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स्कूल में वापस!

April 23, 2013 • Posted in: News

शांति पेंच बाघ अभ्यारण्य व्याख्यान केंद्र में एक सफाई कर्मचारी के रूप में काम करती है। जब हमने पहली बार ई-बेस पर वर्कशॉप का आयोजन शुरू किया, तब उसके दोनों बच्चे जो खवासा स्कूल में अध्ययनरत हैं, ने भाग लिया था।

Shanti trying her hand at the experiments

Shanti trying her hand at the experiments

अपने काम में व्यस्त, शांति छात्रों के साथ गतिविधियाँ करते हुए कर तुरिया के बाहर या ई-बेस में हमसे टकराते हुए गुजरती थी। शायद तभी उसकी जिज्ञासा पैदा हुई और वह हमारी पेशकश रुचि लेने लगी। अपनी शिक्षा कभी नहीं पूरी कर पाने के बाद, ई-बेस के वर्कशॉप ने उसका ध्यान आकर्षित कर लिया और जल्द ही हमने शांति को सुन दूर खड़े एकाग्रचित होकर हमारे आयोजित वर्कशॉप को देखते और सुनते पाया।

पिछले हफ्ते, विज्ञान और प्रकृति का जादू नमक वर्कशॉप का आयोजन करते हुए, हमने शांति को एक कोने में खड़े देखा, उसकी आँखें उड़ते चुम्बक, लावा लैम्प्स और सौर पॉकेट पंखों को देखकर उत्साह से चमक रही थी। वर्कशॉप के अंत में, वह अच्छी तरह देखने के लिए थोडा करीब आई और दबाव पर एक पानी के प्रयोग के बारे में पूछा “ये क्यूँ होता है?”

“आप कोशिश करेंगी?” हमने पूछा।

“हाओ!” उसका जवाब एक मुस्कान के साथ आया था।

उसने ध्यान से सुना और हमारे द्वारा रखे गए कुछ प्रयोगों और वस्तुओं पर हाथ आजमाने की कोशिश की। वह अपने बच्चों के बगल में बैठ गयी और अंत में पता लगा ही लिया की जब हम कागज के एक टुकड़े के साथ गिलास के मुंह को ढंककर उसे उल्टा पकड़ते हैं तब भी गिलास में से पानी बाहर क्यूँ नहीं गिरता है।

सीखने के लिए कभी देर नहीं होती या सिखने की कोई उम्र नहीं होती – यह सन्देश वास्तव में शांति घर-घर पहुंचाती है।

पूजा चोकसी के द्वारा

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